जौनपुर । बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गुर्गो और पूर्व विधायक अभय सिंह ने अजीत सिंह हत्याकाण्ड से करीब छह महीने पहले अपने विरोधी जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को फंसाने के लिये सुरेन्द्र कालिया पर नाटकीय फायरिंग करायी। पर,यह दांव फेल हो गया। पुष्पराज, मो. तारिक फिर बजरंगी की हत्या से लगातार मात खाने वाला यह गिरोह तमतमा गया।
इस बीच ही मुख्तार के करीबी अजीत की हत्या कर दी गई। इस पर यह गिरोह चुप बैठा हुआ था। पर, सुरेन्द्र कालिया ने दो दिन ही रिमाण्ड पर पुलिस अफसरों के सामने ऐसे ही कई राज खोल दिये जिससे इस गिरोह के कई गुर्गें पुलिस की रडार पर आ गये हैं। पुलिस की दो टीमें इनकी कुण्डली खंगाल कर कई साक्ष्य जुटाने में लग गई है।
#सुरेन्द्र कालिया को माफियाओं व सफेदपोशों की शह
पिछले साल 13 जुलाई 2020 को सुरेन्द्र कालिया ने आलमबाग में अजंता अस्पताल के पास खुद पर हमला कराया था। पहले दिन ही यह घटना संदेह के दायरे में आ गई थी। पड़ताल में कालिया के खिलाफ सुबूत मिलने लगे तो वह फरार हो गया। कोलकाता में नाटकीय गिरफ्तारी के बाद कमिश्नरेट पुलिस काफी मशक्कत के बाद उसे लखनऊ जेल ला सकी। एक जून को रिमाण्ड पर आया तो उसने ऐसे राज खोले की अफसर भी हैरान रह गये। फिर उससे डीसीपी सोमेन वर्मा, एडीसीपी चिंरजीव सिन्हा, एसीपी विक्रम सिंह ने कई घंटे पूछताछ की। उसे दो जून की रात एसटीएफ दफ्तर भी ले जाया गया जहां घटना के समय आलमबाग और कृष्णानगर में एसीपी रहे दो अफसरों ने कई साक्ष्यों को दिखाकर पूछताछ की। इसके बाद सुरेन्द्र ने कुबूला कि अयोध्या से पूर्व सपा विधायक अभय सिंह के कहने पर ही उसने यह सब किया।
#मददगारों की पुरी फौज रही
अजीत हत्याकाण्ड के शूटरों की जिस तरह से कदम-कदम पर मदद होती रही, उसी तरह सुरेन्द्र के एफआईआर दर्ज कराने के बाद कई मददगार हर कदम पर उसके साथ रहे। सुरेन्द्र पर जब शक बढ़ने लगा था तो मुख्तार गिरोह के ही एक शख्स ने उसे वहां से हटवा दिया। फिर पुलिस को बताया कि सुरेन्द्र कोरोना संक्रमित हो गये। लिहाजा सुरेन्द्र को 14 दिन का समय मिल गया और इसके बाद वह न घर पर मिला और न शहर में। इसके बाद ही पूर्व विधायक का एक रिश्तेदार उसे कोलकाता तक पहुंचाया आया। कोलकाता में मुख्तार के बेहद करीबी के कहने पर ही एक फ्लैट में रुकने का इंतजाम हुआ। फिर उसकी अवैध पिस्टल के साथ गिरफ्तारी हो गई।
#तहरीर लिखकर अभय सिंह को व्हाटसएप की गई
सुरेन्द्र ने अफसरों को बयान दिया कि घटना के बाद उसे तहरीर देने में देरी हुई थी। उसने बताया कि तहरीर लिखने के बाद एक दूसरे के मोबाइल नम्बर से अभय को व्हाटसएप की गई। अभय के कहने पर ही इस तहरीर में कुछ बदलाव हुआ, फिर मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले में दो शूटर अभी भी फरार चल रहे हैं। डीसीपी सोमेन वर्मा ने बताया कि सुरेन्द्र अपराधी है लिहाजा उसके बयान की हर बिन्दु से जांच कराने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी। साभार
रिपोर्ट: अमित कुमार सिंह
जर्नलिस्ट
a.singhjnp@gmail.com

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