जौनपुर। कहते हैं कि बड़ा बनने के लिए बड़ा महल नहीं, बड़ा हौसला चाहिए। बड़ा दिल चाहिए। इस कथन को सच कर दिखाया है मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने, जिन्होंने अपनी निजी कठिनाइयों को दरकिनार कर मानव सेवा को ही जीवन का एकमात्र धर्म बना लिया।
16 साल का संघर्ष, अटूट संकल्प
पिछले 16 वर्षों से एक किराए के छोटे से मकान में रहते हुए भी सुरेश कुमार शर्मा का सेवा-भाव कभी कमजोर नहीं पड़ा। आर्थिक सीमाओं के बावजूद जब भी किसी असहाय, गरीब या मजबूर की आंखों में दर्द देखा, तो अपना हर कष्ट भूल गए। कई बार ऐसे मौके आए जब खुद के घर में राशन की कमी थी, लेकिन किसी भूखे को खाना खिलाने के लिए वे लोगों से सहयोग मांगने निकल पड़े।
सेवा के लिए चाहिए संवेदना, संपत्ति नहीं
सुरेश जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सेवा करने के लिए अमीरी नहीं, संवेदनशील दिल चाहिए। उन्होंने समाज को दिखाया कि एक साधारण परिवार से निकलकर भी कोई व्यक्ति हजारों चेहरों पर मुस्कान ला सकता है। जरूरतमंदों तक दवा, शिक्षा, भोजन और सहारा पहुंचाना — यही उनके दिन की शुरुआत और रात का सुकून बन गया है।
मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट के जरिए वे लगातार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों से छोटा-छोटा सहयोग जुटाकर बड़ी उम्मीदों को पंख देना, यही उनकी कार्यशैली है।
सम्मान नहीं, जिम्मेदारी का प्रमाण
हाल ही में ट्रस्ट को मिला विश्व स्तरीय सम्मान कोई कागजी तमगा नहीं है। यह उन अनगिनत रातों का सम्मान है जो उन्होंने दूसरों के दर्द को कम करने में गुजारीं। यह उन त्याग और निस्वार्थ भाव का प्रमाण है, जो सालों से बिना किसी प्रचार के चल रहा है।
समाज को ऐसे ही दीपकों की जरूरत
आज जब हर कोई अपने सुख में व्यस्त है, सुरेश कुमार शर्मा जैसे लोग दूसरों के आंसू पोंछने के लिए खड़े हैं। हालातों से हार न मानने वाला यह जज्बा ही उन्हें मानवता की मिसाल बनाता है।
मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट का संकल्प:
“सेवा ही संकल्प, मानवता हमारा धर्म”
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| फाइल फोटो |
रिपोर्ट:अमित कुमार सिंह
एडिटर इन चीफ, परमार टाइम्स
parmartimes@gmail.com

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