जौनपुर के थानों का सफरनामा: 1860 से 2024 तक खाकी के पहरे की पूरी कहानी

जौनपुर के थानों का सफरनामा: 1860 से 2024 तक खाकी के पहरे की पूरी कहानी

जौनपुर। कभी ब्रिटिश हुकूमत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शुरू हुआ थानों का सिलसिला, आज साइबर अपराध तक पहुँच गया है। जौनपुर जिले में पुलिसिंग का इतिहास 160 साल से भी ज्यादा पुराना है। 1861 के पुलिस अधिनियम के बाद जिले में पहला थाना अस्तित्व में आया और आज जिले में कुल 29 पुलिस थानों से कानून-व्यवस्था संभाली जा रही है।

जिले के पुलिस इतिहास को अगर तीन कालखंड में बाँट कर देखें तो इसकी विकास यात्रा साफ समझ आती है।

1. ब्रिटिश काल - जब पड़ी खाकी की नींव (1860 - 1947)

जौनपुर में पुलिस व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत ब्रिटिश राज में हुई।

कोतवाली नगर (1863): यह जौनपुर का सबसे पहला और सबसे पुराना थाना है। 1863 में गोमती किनारे बसे शहर की सुरक्षा के लिए इसे स्थापित किया गया था। तब इसका मकसद ब्रिटिश खजाने और कचहरी की सुरक्षा था।

थाना सरपतहां (1902): जिले का सबसे पुराना मूल पुलिस भवन आज भी सरपतहां में मौजूद है। 1902 में बनी इसकी इमारत आज भी ब्रिटिश स्थापत्य कला की गवाही देती है।

इसके अलावा मड़ियाहू, मछलीशहर, शाहगंज, जफराबाद, बदलापुर और केराकत जैसे प्रमुख कस्बाई थाने 1900 से 1940 के बीच स्थापित किए गए। उस दौर में ये सभी तहसील मुख्यालय थे, इसलिए अंग्रेजों ने यहाँ स्थायी थाने बनाए।

2. आजादी के बाद - विस्तार का दौर (1950 - 1990)

देश की आजादी के बाद जनसंख्या बढ़ी, कस्बे बड़े हुए और अपराध का स्वरूप बदला। इसके चलते नए थानों की जरूरत पड़ी।

इस दौर में मुंगराबादशाहपुर, सुजानगंज, सिकरारा, बक्शा, जलालपुर, चंदवक और गौराबादशाहपुर थाने अस्तित्व में आए। बढ़ती आबादी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुँच बढ़ाने के लिए शासन ने परिसीमन कर इन्हें अलग थाना बनाया।

थाना लाइन बाजार (1992): शहरीकरण के दबाव के कारण 1992 में कोतवाली से काटकर लाइन बाजार को नया थाना बनाया गया, जो आज शहर का सबसे व्यस्त थाना है।

3. आधुनिक युग - विशेष थानों का दौर (2000 से अब तक)

21वीं सदी में अपराध के बदलते चेहरे को देखते हुए विशेष थाने बनाए गए।

महिला थाना: 2000 के दशक में महिलाओं से जुड़े अपराधों की संवेदनशील सुनवाई के लिए जिले में महिला थाना स्थापित किया गया।

सरायख्वाजा, महराजगंज, सुरेरी, पंवारा, रामपुर: 1990 से 2010 के बीच प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत इन नए थानों का गठन हुआ, जिससे ग्रामीण अंचलों में पुलिस की प्रतिक्रिया समय में सुधार हुआ। बक्शा थाना का चौकी रहा तेजीबाजार भी अब थाना बन गया है।

साइबर क्राइम थाना (2023-24): डिजिटल युग में ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया अपराध और साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए जिले को अपना साइबर क्राइम थाना मिला। यह जौनपुर पुलिसिंग के आधुनिकीकरण की सबसे बड़ी कड़ी है।

पुलिस विभाग के अनुसार, जिले के सभी 29 थानों का गठन पुलिस अधिनियम 1861 और समय-समय पर जारी राज्य शासन के राजपत्र (Gazette Notification) के आधार पर किया गया है। 1863 में एक कोतवाली से शुरू हुआ सफर आज 29 थानों तक पहुँच गया है और यह सफर लगातार जारी है।

फाइल फोटो 

रिपोर्ट:अमित कुमार सिंह
एडिटर इन चीफ(परमार टाईम्स)
parmartimes@gmail.com

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